Hasya Ras ka Udaharan aur Paribhasha | हास्य रस का 20 + उदाहरण

Hasya ras ka udaharan aur paribhasha | हास्य रस का 20 + उदाहरण

Hasya ras ka udaharan aur paribhasha – नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है हमरे नए लेख Hasya ras ka udaharan aur paribhasha में . आज के इस लेख में मैं आप लोगो को Hasya ras ka udaharan aur paribhasha बताने जा रहा हु . इस लेख में मैं आप लोगो को हास्य रस का आसान उदाहरण देने वाला हु जो आसानी से आपको यद् हो जाये . यहाँ से आप हास्य रस की परिभाषा और उदाहरण को अच्छे से यद् करले और अपने बोर्ड परीक्षा में सबसे ज्यादा अंक से पास हो यही हमारी कामना है . चलिए जानते है हास्य रस के आसान परिभाषा और उदाहरण के बारे में .

Hasya ras ka paribhasha

Hasya ras ka paribhasha – हास्य रस का स्थाई भाव हास है . किसी व्यक्ति के विकृत रूप , आकार , वेश्बुषा आदि को देखकर ह्रदय में जो विनोद का भाव उत्पन्न होता है , वाही हास्य रस कहलाता है . यही हास नमक स्थाई भाव जब विभव , अनुभव और संचारी भाव से पुष्ट होता है , तब हास्य रस की निष्पत्ति होती है .

Hasya ras ka udahran हास्य रस का उदाहरण

Hasya ras ka udahran हास्य रस का उदाहरण

(1) विघ्य के वासी उसी तपो व्रतधारी महाविन नारि दुखारे। गौतम तीय तरी तुलसी, सो कथा सुनि से मुनिन्द सुखारे सिला सब चन्द्रमुखी, परसे पद-मंजुल कंज तिहारे कीन्हो भली रघुनायक जू करुना करि कानन को पगु धारे |

Hasya ras ka udahran हास्य रस का उदाहरण

(2) पूछति ग्राम वधू सिय सो ‘कहाँ साँवरे से, सखी राबरे को

Hasya ras ka udahran हास्य रस का उदाहरण

(3) साँवरेहि वरजाति क्यों नहीं।
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सुनहु महरि तेरे यास सौ हम पचि हार रही। चोरी अधिक चतुराई सीखी, जयन का कही। तापर सूर बकवन बीलत, बन-बन फिरत नहीं।

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(4) मैया हो न चवहीं गाइ |

सिगरे ग्वाल घिराव मोसों, मेरे पाइपिराइ जो न पत्याहि पूछ बलवाठहि अपनी साँह दिवाइ |

स्पष्टीकरण-(1) स्थायी भाव-हास (हंसी)। (2) विभाव- (क) आलम्बन-विन्ध्य के वासी तपस्थी आश्रय पाठक

(ख) उद्दीपन-अहल्या की कथा सुनना, राम के आगमन पर हो र (3) अनुभाव-हँसना।

(4) संचारी भाव-स्मृति, चपलता, उत्सुकता आदि।

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(5) पूछति ग्राम वधू सिय सो, ‘कहीं साँवरे से, सखि एवरे को है?

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(6) आगे चना गुरुमात दए ते, लए तुम चाबि हमें नहि दीने स्याम कह्यो मुसकाय सुदामा सौं, चोरी की बान में ही जू प्रयीने।। पोटरी काँख में चापि रहे तुम, खोलत नाहि सुधारस पनि। पाछिली बानि अजौ न तजौ तुम, तैसई भाभी के तन्दुल कीन्हे |

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निष्कर्ष

आज के इस लेख में अपने जाना हास्य रस का उदाहरण और परिभाषा को . अगर आपको हमारे द्वारा दी गयी जानकारी अच्छी लगी हो तो आप इसे दुसरो के साथ भी शेयर करे .

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